Thursday, 1 February 2018

55 WPM Hindi Dictation for High Court, SSC Steno & CRPF Typing Exam Post 253 With Matter

पार्ट – 253

कुल शब्‍द 548

55 WPM Hindi Dictation for High Court, SSC Steno & CRPF Typing Exam Post 253 With Matter

नरेन्‍द्र मोदी जी ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के पूना से केम्‍पेन की शुरूआत की। उनहोनें कहा कि हिमाचल में भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आंधी चल रही है लेकिन चनुाव में मजा नहीं आ रहा कांग्रेस मैदान से भाग गई है, नोट बंदी पर प्रधान मंत्री ने कहा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नोटबंदी से इंकार कर दिया था। जब जरूरत थी, तब इंदिरा गांधी यह काम करती तो मुझे इतना बढ़ा कदम उठाने की जरूरत नहीं पढ़ती। मोदी ने पालमपुर और कुल्‍लु में भी जनसभाओं को संबोधित किया। बता दे कि हिमाचल में 9 नवम्‍बर को 1 फेज में चुनाव है। नतीजे 18 दिसम्‍बर को आयेगे।
         मोदी ने पूना में कहा ‘चुनाव आखिरी दौर में यह मेरा तीसरा दिवस है, जब हिमाचल के धरती पर आप सब के दर्शन करने का आपका आर्शीवाद पाने का मौका मिला है’ भाईयों बहनो चुनाव हमने बहुत देखे है चुनाव लड़े है और लड़वाये भी है। हिमाचल के चुनावों से भी जुड़ा रहा हूं। शायद ही ऐसी कोई तहसील हो जहां के चुनावों में मैं नहीं गया। उस वक्‍त एक वालंटइयर के नाते आप लोगों की तरह नीचे बैठकर सभा अच्‍छे से हो, माईक ठीक से चले यह सब काम मैं देखता था। बाद में गुजरात का मुख्‍यमंत्री बना तो चुनावी सभाओं में आने का अवसर मिला’ 2014 में लोक सभा चुनाव प्रचार के लिए आने का मौका मिला, अब विधान सभा चुनाव के प्रचार के लिए बीस साल में एक भी ऐसा चुनाव नहीं गया जब हिमाचल के किसी चुनाव से मेरा सीधा संबंध नहीं रहा’ यह भी है कि इन बीस साल में मैंने हिमाचल में ऐसा चुनाव नहीं देखा जैसा इस बार है। साफ पता चल रहा है कि हवा का रूख किसी तरफ है। इस बार देख रहा हूं कि हवा का रूख जानने  पहचानने की जरूरत नहीं, यहां तो आंधी चल रही है।

         मोदी ने कहा ‘’भ्रष्‍टाचार के खिलाफ यहां जनता का गुस्‍सा फूट पड़ा है। इस बार अठारह दिसम्‍बर को हम सब को कहना पड़ेगा हिमाचल का चुनाव ना बीजेपी का लड़ता है ना ही कार्यकर्ता और ना ही विधायक उम्‍मीदवार लड़ता है, यहां का चुनाव यहां की जनता लड़ती है लोकतंत्र में जय पराजय होते रहते है। यह लोकतंत्र का उत्‍सव है। मुझे इस चुनाव में एक बार की पीढ़ा बनी रहेगी मजा नहीं आ रहा है क्‍योंकि कांग्रेस पार्टी मैदान छोड़कर भाग गई। देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री कहते थे कि दिल्‍ली से 1 रूपया चलता है लेकिन जनता के पास पन्‍द्रह पैसे पहुचते है। आखिर वो कौन सा पंजा था जो ऐसा करता था। आधार से सिलेंडर को जोड़ा मोदी जी ने कहा कि हमने आधार के साथ सिलेंडर को जोड़ा और देश की करोड़ो रूपए की चोरी होने से बचा दी। कई जगह जो ऐसा नजर आया कि स्‍कूल में टीचर की तन्‍ख्‍वाह जा रही है लेकिन ना तो टीचर है और ना ही इस नाम का कोई व्‍यक्ति जब आधार से जोड़ना शुरू किया तो पता चला कि जो पैदा ही नहीं हुए थे वे भी तन्‍ख्‍वाह ले रहे थे। लाखों नाम ऐसे हैं कि जो बेटी जन्‍मी हीं नहीं वह विधवा हो गई और दिल्‍ली से सब्सिडी का पैसा जा रहा है आपकों प्रसन्‍नता होगी कि आप हिमाचल के लोगों ने लोक सभा के सीटें जिता कर मोदी को प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन काम दम से करना है। 

Dictation For High Court, Also for SSC, Court LDC Exam Post 257 With Matter

पार्ट 257

कुल शब्‍द 455

Dictation For High Court, Also for SSC, Court LDC Exam Post 257 With Matter

20/02/1996 की घटना होकर 29 तारीख को न्‍यायालय के समक्ष पहुंचा हो यह अभियोजन से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि मजिस्‍ट्रेट को प्रथम सूचना रिपोर्ट के घंटे विलय का वह स्‍पष्‍ट करे परंतु तत्‍समय विद्यमान परिस्थिति के अंतर्गत उसे  यथा संभव युक्तियुक्‍त समय के भीतर अवश्‍य भेंज देना चाहिए। अत: जहां कोई रिपोर्ट दिन में बारह बजे दाखिल की गई है और प्रकरण के तथ्‍यों और परिस्थितियों कें संदर्भ में तथा पुलिस थाने पर पुलिस बल की पर्याप्‍त संख्‍या के अभाव को ध्‍यान में रखकर यदि उसे शाम छह बजे भेज दिया जाता, वहां यह नहीं कहा जायेगा कि विलंब किया गया।
         इस संहिता की धारा 157-1 में प्रयुक्‍त तत्‍काल शब्‍द का तात्‍पर्य निसंदेह केवल यह है कि एक युक्तियुक्‍त संदेह के भीतर और बिना किसी अयुक्तियुक्‍त विलबं उसे मजिसट्रेट को अग्रसारित कर देना चाहिए। फिर भी उसकी प्रति को तत्‍काल नहीं भेजा जाता तो केवल इसी कारण अभियोजन का संपूर्ण प्रकरण संदेहपूर्ण नहीं बन जाता अपितु इस बजह से न्‍यायालय को सतर्क हो जाना पड़ता है और विलंक का स्‍पष्‍टीकरण जानने का प्रयास करना होगा यदि नहीं किया जाता तो यह सावधानी रखनी चाहिए। निर्दोष व्‍यक्तियों को मिथ्‍यापूर्ण ढंग से नही फसाया गया है।

         जहां घटना प्रात: दस बजे के लगभग घटित हुई हो और क्षतिव्‍यक्ति को  अस्‍पताल में भरती करया दिया गया हो जो अपना कथन करने में अस्‍मर्थ और साक्षी द्वारा कथन के अधार पर सायम काल सात बजे प्रथम सूचना रिपोर्ट दाखिल की गई हो प्रतिरक्षा पक्ष द्वारा यह दलील दी गयी हो कि अभियोजन साक्षी के अनुसार स्‍टेशन गई थी जहां अपराध के शिकार व्‍यक्ति द्वारा रिपोर्ट की गई ततपश्‍चात विचारण न्‍यायालय द्वारा साक्षी काउक्‍त कथन जो कि एक विभ्रम की ओर किया गया प्रतीत होता है। उक्‍त धारा 439-1 के अधीन जमानत पर विस्‍तार के विषय में विनिश्चित करते समय न्‍यायालय को सुसंगत हेतुकों पर विचार करना अपेक्षित है। उच्‍च न्‍यायालय के आदेश से यह प्रकट होना चाहिए कि जब वह जमानत की प्रार्थना पर राय का निर्माण कर रहा था तब वह उन कारणों के प्रति सजग और सतर्क था जो सृजनशीलता द्वारा जमानत की प्रार्थना को खारिज करने के लिए व्‍यक्‍त किए गए थे। वर्तमान प्रकरण एक ऐसा ही मामला था जिसमें ऐसी परिस्थितियां अतरविलित थी जिनमें जमानत मंजूर करने के लिए विशेष कारणों की अपेक्षा का पुर्नविलोकन करने की अपेक्षा अंतरग्रस्‍त थी। प्रकरण के तथ्‍यों और अभियुक्‍त के पूर्व इतिहास तथा इतिवृत्‍तों पर विचार करते हुए जमानत को अस्‍वीकृत कर दिया था। उच्‍च न्‍यायालय द्वारा ऐसी किसी बात को उल्लिखित किए बिना ही क्‍यों वह आदेश के विरूद्ध राय का निर्माण कर रहा है? जमानत को मंजूर करना एक गलत विनिश्‍चय था। धारा 439 के अधीन जमानत रद्ध करने का प्रश्‍न विनिश्चित रूप से जमानत की संस्‍वीकृति के प्रश्‍न से भिनन है।

Dictation For High Court, Also for SSC, Court LDC Exam Post 258 With Matter

पार्ट 258
कुल शब्‍द 603

Dictation For High Court, Also for SSC, Court LDC Exam Post 258 With Matter

यदि आप डाक्‍टर है और आप अस्‍थमा  के भीषण के अटैक में आपके रोगी का दम घुट रहा हो तो शरीर में साइड इफेक्‍ट की परवाह किए बगैर स्‍टेराईड पंप करने के अलावा आप क्‍या करेगे। 70 फीसदी बैंकिंग सरकारी हो या वे दिवालिया होने के करीब हो तो आप क्‍या करेंगे? फंड खड़ा करने के लिए बांड जारी करने का आईडिया चतुराई भरा है। लेकिन अब नकदी से मालामाल अन्‍य सार्वजनिक उपक्रम जिनमें ज्‍यादातर ऊर्जा क्षेत्र की मोनोपॉली है है को यह बांड खरीदने को कहा जायेगा यह विचलित करने वाली बात है।
         हम इतने भी ना समझ नहीं है कि उनसे इंद्रा गांधी की सबसे खरबा विरासत बैंको के राष्‍ट्रीकरण को उलटने की मांग करे लेकिन वे सिर्फ दो सबसे ज्‍यादा संकट में फसे बैंक बेचने से शुरूआत करके घोषणा कर सकते थे कि अगले दस साल तक हर साल सबसे खराब बैंलेश शीट वाला बैंक बेच दिया जायेगा इससे बाजारों में बिजली दौड़ जाती, दूसरे बैंको झटका लगता। वे बेहतर काम करते, राजनीतिक वर्ग पर वोट खरीदने के लिए कर दाता का चेक देने पर पाबंदी लगती और मोदी का नाम महान सुधारकों में शामिल होता।

         पर क्‍या मोदी जी बाकई चाहते है कि क्‍या उनहे आर्थिक सुधारक के रूप में याद रखा जाए। सार्वजनिक उपक्रमों से वादा करना या विजनेस में सरकार का होना सुधारक होने की एक मात्र कसौटी नहीं है। लेकिन, यह अहंम है कोई भारतीय नेता यहां तक कि मनमोहन सिंह, पीवी नरसिंह राव और पी चिदम्‍बरम सार्वजनिक उपक्रम बेंचने की हिम्‍मत नहीं जुटा सका। केवल अटल विहारी बाजपेयी जी का यह वादा था उनहें सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने रोक दिया। संसद की मंजूरी के बिना विनिवेश पर इसने रोक लगा दी और तेल के दो दिग्‍गज कंपनियों एचपीसील और बीपीसीएल की बिक्री रूक गई। मोदी से उम्‍मीद थी कि वे अपनी ही पार्टी के प्रेरण-पुरूष का अनुसरण करते इसकी बजाह वे क्‍या कर रहे है? वे अपनी ही ओएनजीसी को एचपीसीएल बेच रहे है एक बार फिर से ही मायलों से व्‍यापार कर रहा है। वह भी सरकारी धन से। केच-23 मोदी समर्थकों का कहना ठीक है कि वे आज चुपके से सुधार नहीं किए जा सकते थे लेकिन जनमत बदलने में मोदी से ज्‍यादा माहिर कौन है? सवाल है कि वे ऐसा कयों नहीं कर रहे है वे इसे करना भी चाहते है या नहीं? और यदि नहीं, तो वे चाहते क्‍या है? उत्‍तर हैउनकी राजनीति। वाजपेयी के विपरीत वे प्रतिबद्ध स्‍वयं सेवक है और उनहीं तरह पुराने आरएसएस बाले सामाजिक अर्थशास्‍त्र की नादानी को  ठहाकर लगाकर खारिज करने की बजाह इस पर सच्‍चा भरोसा है। मोहन भागवत की तरह सच्‍चा स्‍वयं सेवक बनने और बाजपेयी की तरह आधुनिक सुधारक की तरह याद रखे जाने की चाहत के बीच फसकर वे एक और इंद्रा गांधी बन कर रह जाते है, एक महान साख्किीबविद एक महान आर्थिक राष्‍ट्रवादी विस्‍तारवादी और उत्‍रोत्‍तर नियंत्रण बढ़ाती सरकार को चला रहा है। मैं उनकी राजनीतिक- आर्थिक धारणा कुछ ऐसी ही पाता हूं। सरकार द्वारा अर्थव्‍यवस्‍था चलाने में कुछ गलत नहीं है जब तक कि आप सरकार बुद्धिमानी और ईमानदारी से चलाते है। आदर्श राज्‍य की तलाश कभी सफल नहीं हुई संभावना अब भी नहीं है। मोदी ने अपनी युवावस्था और प्रौण आयु पूर्णकालिक स्‍वयं सेवक के रूप में गुजारी है और उसका असर आसानी से नही जायेगा। लेकिन, अब  दुनिया से वास्‍ता विश्‍व नेताओं से मुलाकात, सफल अर्थव्‍यवस्‍थाओं व समाजों को चलता देखना, उन पर असर डालेगे और वे भी नवउदारवादी आदर्श गले लगायेंगे। सामाजिक धार्मिक रूढि़वाद और उदारवाद के साथ नहीं रह सकते। यही वह राजनीति है जहां मोदी का अर्थशास्‍त्र फस गया है इसे हम क्‍या नाम दे? मैं बताता हूं कैच-24 पॉलिटिक्‍स ।

Dictation For High Court, CPCT Also for SSC, Court LDC Exam Post 252 With Matter

पार्ट 252

कुल शब्‍द 407

Dictation For High Court, CPCT Also for SSC, Court LDC Exam Post 252 With Matter



धरती पर मानव जाति का बजूद आदमी और औरत दोनों की समान भागीदारी कि बिना असंभव है। किसी भी देश के विकास के लिए नर और नारी दोनों ही समान रूप से जिम्‍मेदार है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि महिलाएं पुरूषों से अधिक महत्‍व रखती है। औरतों के बिना हम मानव जाति की निरंतरता के बारे में  नहीं सोच सकते क्‍योंकि वो मानव को जन्‍म देती हैं। इसलिए कन्‍या शिशु को नहीं मारा जाना चाहिए उनहें आगे बढ़ाने के लिए सुरक्षा सम्‍मान और समान अवसार प्रदान किए जाने चाहिए। हालांकि महिलांए हत्‍या और दहेज प्रताड़ना आदि से अपनी ही बनाई गई सभ्‍यता में पीढि़त है। यह कितना शर्मनाक है। बहुत से समझदार लोगों के अनुसार एक शिशु कन्‍या को अनेक कारणों के लिए बचाया जाना चाहिए, जैसे कोई भी लड़की किसी भी क्षेत्र में लड़कों की तुलना में कम सक्षम नहीं है और अपना सर्वश्रेष्‍ठ देती है। 1961 से कन्‍या की गर्भ में ही हत्‍या करवा देना एक गैर कानूनी अपराध है। यह ही नहीं, लिंग परीक्षण चुनाव के बाद गर्भपात को रोकने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। किसी लड़के से तुलना तो यह अवश्‍य कहा जा सकता है कि एक लड़की अधिक आज्ञाकारी कम हिंसक और अभिमानी होती है। वह अपने परिवार, नौकरी, समाज या देश के लिए ज्‍यादा जिम्‍मेदार साबित हो चुकी है। इसके  अतिरिक्‍त माता पिता और उनके कार्यो की अधिक परवाह लड़कियों को  भी ज्‍यादा होती है। यही कारण है कि सरकार ने लड़कियों को बचाने और शिक्षित करने के लिए बहुत से कदम उठाये गये है। बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं सरकार की ही एक पहल है। विभिन्‍य सामाजिक संगठनों ने महिला स्‍कूलों में शौचालय के निर्माण से अभियान में मदद की है। बालिकाओं और महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध के विकास में एक बड़ी बाधा है।  गर्भ में ही कन्‍या की हत्‍या करना बेहद संगीन जुर्म में से एक है और सरकार ने अस्‍पतालों में लिंग निर्धारण, स्‍केन परीक्षण आदि के लिए अल्‍ट्रा साउंड पर रो लगा दी है। सरकार ने यह कदम इसलिए लिया है ताकि वह लोगों को बता सके लड़की को जन्‍म देना किसी भी समाज में अपराध नहीं है। भारत में लड़की लक्षमी  का रूप मानी जाती है और यह भगवान का दिया हुआ एक खूबसूरत तोहफा है इसलिए एक बेटी से कभी भी नफरत नहीं करनी चाहिए। समाज और देश की भलाई इसी में है कि हम सब मिलकर लड़कियों को बहुत सारा सम्‍मान दें और बहुत सारा प्‍यार दे।

40 WPM Hindi Dictation for high court Post 251 हिंदी डिक्टेशन 30 WPM - 35 WPM

पार्ट 251 हिंदी डिक्टेशन 30 WPM - 35 WPM
कुल शब्‍द 320

Dictation For CPCT Also for SSC, Court LDC Exam Post 251 With Matter

माननीय उच्‍च न्‍यायालय एवं प्रमुख सचिव मध्‍यप्रदेश शासन के आदेशों की अवहेलना कर लगभग तीन माह होने पर भी उक्‍त आदेशों की धज्ज्जिया शिक्षा विभाग द्वारा उडा़ई जा रही है।

         माननीय मुख्‍य मंत्री के द्वारा चलाई जा रही जन सुनवाई के आवेदनों पर अनुचित कार्यवाही कर उनहें ठेगा दिखाया जा रहा है। मैंने दिनांक 25/07/17 को जनसुनवाई को आवेदन दिखा गया कि जैसा की कलेक्‍टर ‘’विधी शाखा द्वारा आदेश दिए गए है। उसकी भांति मेरा भी आदेश कलेक्‍टर कार्यलय की विधि शाखा द्वारा करवाने की कृपा करे। उक्‍त आवेदन श्रीमान सीईओ जिला पंचायत सागर द्वारा श्रीमान डीईओं साहब दिया गया है। श्रीमान डीईओं साहब द्वारा घबराकर जल्‍वाजी में बेकडेट में अपने कार्यलय की विधि शाखा द्वारा वर्तमान समय में नियुक्ति के अधिकार ना होते हुए पत्र श्रीमान सीईओं जनपद पंचायत शाहगढ़ को भेजा गया, प्रार्थी अपने प्रकरण का पता लगाने कार्यलय डीईओं सागर गया तो कार्यलय द्वारा उक्‍त पत्र की फोटोकापी दिनांक 04/08/2017 को दी गई उसे लेकर प्राथी सीईओ जनपद पंचायत शाहगढ़ दिनांक 02/08/17 को गया परंतु कार्यलय में पत्र नहीं पहुंचा इसके बाद जिला कलेक्‍टर कार्यलय सागर एवं मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सागर में पता लगाया गया। आज दिनांक तक प्रतिलिपी अप्राप्‍त है इस प्रकार मेरे द्वारा खोजबीन करने पर पता चला कि उक्‍त पत्र दिनांक 02/08/17 को डीईओं कार्यलय द्वारा डाक रजिस्‍टर पर चढ़ाकर शाहगढ़ भेजा गया है। मेरे द्वारा कोई आवेदन दिया जाता है। तो शिक्षा विभाग द्वारा कोई नया बखेड़ा खड़ा कर अड़न्‍गा लगाना इनकीनियति बन गई है अत: आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय एवं प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मध्‍यप्रदेशा शासन भोपाल के आदेशों के परिपालन में मेरा नियुक्ति आदेश देकर मेरे साथ न्‍याय प्रियता प्रदान करने की कृपा करने की दया करे। यदि प्रार्थी का एक सप्‍ताह में नियुक्ति आदेश नहीं दिया गया तो मजबूरन प्राथी डबल कोर्ट अवमानना हेतु माननीय उच्‍च न्‍यायालय की न्‍याय पाने हेतु शरण लेगा जिसका समस्‍त उत्‍तरदायितव्‍ आपका एवं शासन का होगा। 

Hindi Dictation For CPCT 40 WPM Also for SSC, Court LDC Exam Post 250 With Matter

Dictation For CPCT 40 WPM Also for SSC, Court LDC Exam Post 250 With Matter


पार्ट 250
कुल शब्‍द 398

Dictation For CPCT 40 WPM Also for SSC, Court LDC Exam Post 250 With Matter- 


किसी जंगल में एक शेर रहता था। उसका एक अजीब सा शौक था कि उसे हर दिन एक नये तरह के जानवर का मास खाना होता था। इसके चलते वह प्रतिदिन अलग अलग जानवरों का शिकार करता और अपने पेट की आग बुझाता एक दिन उसके मन मे आया क्‍यों ना आज रात के खाने में किसी गधे का मास खाकर भूख मिटाई जाये। यह सोच कर उसने अपने सहायक लोमड़ी से कहा कि वह उसके लिए कोई गधा ढूढ लाये। गधे को फुसलकार लाने की तरकीब बताते हुए शेर ने कहा कि तुम यह कहना कि मैंने उसे शादी के रिश्‍ते की बात करने के लिए बुलाया है। शेर का आदेश सुनकर लोमड़ी किसी गधे की तलाश में निकल पड़ा और आखिर में उसे एक गधा मिल ही गया जिसे उसने शेर का संदेश सुना दिया। बादशाह के परिवार में रिश्‍ते की बात सोचते ही गधा बेहद खुश हुआ और फूल कर कुप्‍पा हो गया। वह तुरंत ही लोमड़ी के साथ चल पड़ा। जैसे ही वे दोनों शेर की गुफा के पास पहुंचे तो शेर एकदम से गधे पर झपट पड़ा और अपने एक ही पंजे के बार से उसका काम तमाम कर दिया। फिर अपने सहायक लोमड़ी से कहा कि मेंरे शिकार का ध्‍यान रखना, मैं जरा नहा लूं। उसके  बाद इसे खाऊंगा ।  यह कह कर शेर तो नहाने चला गया लेकिन तभी लोमड़ी को लालच आ गया। शेर के आने से पहले गधे के शरीर का बेहतरीन हिस्‍सा यानी दिमाग निकाल कर खा गया। नहा कर जब शेर लौटा और गधे की ओर देखा तो उसने पाया कि गधे का दिमाग गायब था। लोमड़ी ने अपने सपने में भी नहीं सोचा था कि शेर का ध्‍यान गधे के गायब दिमाग की ओर चला जायेगा। लेकिन चालाक होने के कारण लोमड़ी ने फटाफट जबाव दिया, कि मालिक गधे का दिमाग होता ही नहीं है मैं क्‍या उसे तो कोई भी नहीं खा सकता। कोई बिना दिमाग वाला गधा ही तो शाही घराने में रिश्‍ते की बात सोच सकता है। शेर इस बात से सहमत हो गया और कहने लगा कि तुम्‍हारी बात बिलकुल सही है बस इतना कहकर शेर ने गधे का बचा हुआ मांस खाकर अपनी भूंख मिटाई। और गुफा में जाकर सो गया इस कहानी से पता चलता है कि हमें कभी भी किसी की बात पर बिना सोचे समझे भरोसा नहीं करना चाहिए।  इसलिए सदा समझदारी से काम  लेना चाहिए चाहे उसमें

60 WPM Hindi Dictation Shorthand & Steno For Court & SSC LDC Exam post 232 With Matter

पार्ट 232
शब्‍द –611
समय 9 मिनिट 30 सेंकेंड

भ्रष्‍टाचार का अर्थ प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष लाभ प्राप्ति हेतु जानबूझ कर निश्चित कर्तव्‍य ना करना ही भ्रष्‍टाचार है। दूसरे शब्‍दों में हम यह कह सकते हैं कि भ्रष्‍टाचार का अर्थ अनुचित लाभ है जहां अनुचित साधनों को अपनाकर लाभ प्रापत किया जाए, वहीं भ्रष्‍टाचार है। भ्रष्‍टाचार में कर्तव्‍य का उल्‍लघंन किया जाता है यह उल्‍लंघन जानबूझ कर किया जाता है। कर्तव्‍य के इस उल्‍लंघन से व्‍यक्ति को प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से कोई निश्चित लाभ होता है इस प्रकार हम कह सकते है कि जहां कहीं भी रूपए पेसे के लिए पद प्रापत करने के लिए या संपत्ति हड़पने के लिए अथवा अन्‍य किसी लाभ के लिए जानबूझकर कर्तव्‍य का उल्‍लंघन किया जाए वहीं भ्रष्‍टाचार है। भ्रष्‍टाचारी व्‍यक्ति सदैव सेवा और सहयोग की भावना को नाटकीय ढ़ंग से  उपस्थि‍त करता है परंतु यर्थाथ में वे इन भावनाओं से दूर रहते है। समाज के सार्वजनिक जीवन में होने वाले भ्रष्‍टाचार को स्‍पष्‍ट करते हुए कए विद्यावना ने लिखा है सभ्रांत कहे जाने वाले व्‍यक्ति जो सार्वजनिक हितों को त्‍याग कर व्‍यक्तिगत स्‍वार्थो को प्रधानता देने लगते हैं वे अनुचित लाभों केउपयोग की आशा में समाज एवं कानून विरोधी साधन अपनाते है तो उसे सार्वजनिक जीवन में भ्रष्‍टाचार कहते है। भ्रष्‍टाचार के क्षेत्र के अनुसार सार्वजनिक जीवन में होने वाले भ्रष्‍टचार का क्षेत्र अत्‍यंत व्‍यापक है इस भ्रष्‍टाचार में दो बाते मुख्‍य है पहली शक्ति का दुर्पयोग और दूसरी इस दुर्पयोग से प्राप्‍त होने वाले किसी लाभ की आशा।

         आधुनिक युग में यह दोनों ही बाते बड़े व्‍यापक रूप में देखने को मिल रहीं है। अशिक्षित व्‍यक्तियों को जाने दीजिए। शिक्षित व्‍यक्ति भी अपने तुक्ष्‍य स्‍वार्थ के लिए दूसरे का बड़े से बड़ा नुकसान करने में नहीं हिचकिचाते। बड़े बड़े इंजीनियर ठेकेदारों से धन लेकर ऐसी इमारतों  को पास कर देते है जो कुछ ही वर्षो में गिर जाती है। कभी कभी तो एसी इमारतों के लिए धन स्‍वीकृत किया जाता है जिनका कभी निर्माण ही नहीं होता। इस प्रकार विभागों द्वारा खरीदे जाने वाले सामान में ऐसा सामान लिया जाता है जो व्‍यर्थ का होता है। यह भ्रष्‍टाचार किसी देश विदेश तक सीमित ना होकर सार्वजनिक जीवन की प्रत्‍येक क्षेत्र में  है इससे देश का करोड़ो रूपया बर्बाद होता है आधुनिक युग में सर्वत्र इसी भ्रष्‍टाचार का बोलवाला है रॉक ने ऐसे भ्रष्‍टाचारियों व्‍‍यक्तियों के लिए लिए है कि वे समाज मे नैतिकता का गला घोटते है और आत्‍मविश्‍वास की भावना को प्रोत्‍साहन देकर सामाजिक विघटन की स्थिति उत्‍पन्‍न करते है। हमारे जनजीवन का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं हैं जहां भ्रष्‍टाचार का यह रूप देखने को ना मिलता हो। हमने पहले ही इस बात का उल्‍लेख किया है कि भारत में लोकजीवन में भ्रष्‍टाचार अत्‍याधिक व्‍यापका मात्रा में देखने को मिलता है। इस भ्रष्‍टाचार के अनेक कारण है। यहां हम कुछ प्रमुख कारणों को संक्षेप में चर्चा कर रहे है। अर्थका विशेष महत्‍व वर्तमान युग में  धन का महत्‍व सब चीजों से अधिक हो गया है। धन की तुलना में कोई भी चीज नहीं रह गई है। उसी व्‍यक्ति का सम्‍मान होता है जिसके पास धन है समाज में प्रतिष्‍ठा  पाने के लिए अत्‍यंत आवश्‍यक है इसलिए सभी व्‍यक्ति अधिक से अधिक धन कमाने का प्रयास करते है यदि वे उचित साधनों से इसे प्राप्‍त नहीं कर पाते तो भ्रष्‍टाचार के साधनों को अपनाने में किंचित मात्र भी नहीं हिचकिचाते। उंच नींच की खाई भारत में उंच नीच की खाई भारत में गहन रूप से विद्यमान है कुछ लोग बहुत अधिक धनबान है तो कुछ  निर्धन। धनवान निरंतर अपनी आय बढ़ाने में निर्धनों के नुकसान की चिंता नहीं करते। कुछ कर्मचारी ऐसे है जिनको कम वेतन मिलता है यदि वे भ्रष्‍टचार के साधनों को नहीं अपनाते तो उनका अपना पेट भी भरना।

70 WPM

चेयरमेन साहब मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि हम लोग देख रहे है कि गरीबी सबके लिए नहीं है कुछ लोग तो देश में इस तरह से पनप रहे है‍ कि उनकी संपत...