Tuesday, 13 February 2018

Hindi Dictation Legal (High Court & SSC LDC) Post-119। 40 WPM। Probation


कुल 457
समय 11 मिनिट 20 सेकेंड
दण्‍डशास्‍तीय विचारों कें विकास में प्रोबेशन का अपना विशिष्‍ट महत्‍व है। इसमें अपराध के प्रति समाज की दण्‍डात्‍मक तथा उपचारात्‍मक दोनों प्रक्रियाओं का समावेश है। यह एकपकार से दण्‍ड का ससर्त निलबन है। दोषसिद्ध व्‍यक्ति के दण्‍ड को इस शर्त पर निलंबित किया जाता है कि वह अच्‍छे आचरण को अपनायेगा। इस निमित्‍य राज्‍य पर्यवेक्षण की सुविधा प्रदान कर अच्‍छे आचरण के अनुपालन में सहायता देता है।
         अंग्रेजी का प्रोबेशन शब्‍द लेटिन भाषा के प्रोबेयर से विकसित हुआ है, जिसका अभिप्राय प्रमाणित अथवा परिक्षा करना है। विगत शताब्‍दियों में इग्‍लैण्‍ड में यह अनुभव किया गया कि कठोर दण्‍ड के दिए जाने से अपराधी का सुधार नही होता अत: सस्‍पेडेंड सेटेंस देने की विधि का विकास हुआ। इसेक अंतर्गत, अपराधी को भविष्‍य में अच्‍छा आचरण करने की शर्त पर छोड़ दिया जाता था। वस्‍तुत: दण्‍ड की इसी पद्धति में प्रोवेशन का विकास हुआ। इसमें देखरेख की व्‍यवस्‍था नहीं है अत: पुर्नवास की दृष्टि से अधिक सफल नहीं है। इस लियम में दण्‍ड सुनाये जाने के पूर्व अथवा पश्‍चात न्‍यायाधीश अपराध को इस शर्त पर मुक्‍त दण्‍ड सुनाये जाने पर मुक्‍त कर  देता है कि वह भविष्‍य में अपराध नहीं करेगा, अगर वह अपराध करता है तो उसे दोषो अपराधों का दण्‍ड दिया जायेगा। इस प्रकार प्रोबेशन एक अदालती पद्धति है जिसमें अपराध प्रमाणित हो जाने पर अपराधी कारावास में भेजे जाने के स्‍थान में एक निश्चित अवधि तक सद्व्‍यवहार बनाये रखने का बान्‍ड भरने पर मुक्‍त कर दिये जाते है।
         इसकी उत्‍पत्त्‍ि किन्‍हीं स्‍टेब्‍यूट में नहीं हुई थी। सन् 1841 में जॉन आगस्‍टस मोची ने मुख्‍यत: शराबियों को छुड़ाकर मैत्रीपूर्ण निरीक्षण रखना आरंभ किया। इस प्रकार आगस्‍टस एक स्‍वयं सेवी प्रोबेशन अधिकारी था। इसके पूर्व इस संबंध में प्रसिद्ध न्‍यायाधीश पीटर हैचर की अदालत का अनौपचारिक निर्णय भी विद्यमान है। सन 1878 में मैचास्‍यूटिस में प्रोवेशन का नियम पास किया।
         वर्तमान संदर्भ में प्राबेशन का अभिप्राय न्‍यायालय की उस पद्यति से है जिसमें अपराधी को, एक निश्चित समय तक अच्‍दे व्‍यवहार को बनाए रखने का अस्‍वासन देने पर मुक्‍त्‍ कर दिया जाता है। दूसरे शब्‍दो में दोषी सिद्ध होने के बाद यह अपराधी की वह स्थ्‍ति है जिसमें अपराधी को अच्‍दे व्‍यवहार की शर्तो पर छोड़ दिया जाता है। और राज्‍य व्‍यक्कितगत निरीक्षण द्वारा अपराधी को अच्‍छा व्‍यवहार करने के लिए सहायता  देता है।
         प्रोबेशन दण्‍ड को स्थिगत रखने की स्थिति में दोषी थहराये गये अपराधी की वह स्थिति है जिसमें उसे अच्‍छे व्‍यवहार की शर्त पर छोड़ दिया जाता है और उस अवधि में राज्‍य व्‍यक्तिगत निरीक्षण द्वारा उसे सदाचरण बनाए रखने में सहायता करने का प्रयत्‍न करता है। रीन मेन ने कहा है कि प्राबेशन अपराधियों के उपचार का एक तरीका है जिसमें अदालत द्वारा लगई गई शर्तो के अनुसार सद्व्‍यवहार करने पर वह मुक्‍त्‍ किए जाते है और प्राबेशन

Monday, 12 February 2018

Dictation Hindi 45 WPM (Court Matter Link) For High Court & SSC Steno Typing Post-117


कुल 474
पार्ट – 117
Dictation Hindi 45 WPM (Court Matter Link) For High Court & SSC Steno Typing Post-117


लाइसेंस एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा प्रतिलिप्‍याधिकार स्‍वामी अपनी कृति के संबंध में ऐसा कुछ  करने की अनुमति किसी अन्‍य व्‍यक्ति को प्रदान करता है जिसे अनुमति के अभाव में किए जाने की दशा में प्रतिलिप्‍याधिकार स्‍वामी का अतिलंघन होगा। इस व्‍यक्ति को कुछ करने की अनुमति प्रतिलिप्‍याधिकार स्‍वामी प्रदान करता है उसे लाइसेंस धारक या अनुज्ञप्ति धारक तथा प्रतिलिप्‍याधिकार स्‍वामी को अनुज्ञपित कर्ता या लाइसेंस कर्ता कहते है।
         धारा 30 प्रतिलिप्‍याधिकार के वर्तमान स्‍वामियों एवं भावी स्‍वामियों को लाइसेंस प्रदान करने शक्ति प्रदान करती है। धारा 30 निम्‍नलिखित है। किसी विद्यमान कृति में प्रतिलिप्‍याधिकार का स्‍वामी या किसी भावी कृति में प्रतिलिप्‍याधिकार का होने वाला स्‍वामी अपने द्वारा या अपने सम्‍यकत: प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा हस्‍ताक्षरित लिखित अनुज्ञपित से उस अधिकार में किसी हित का अनुदान कर सकेगा। परंतु किसी भावी कृति में प्रतिलिप्‍याकधकार से संबंद्ध अनुज्ञप्ति के दशा में, वह अनुज्ञप्ति तभी प्रभावशील होगी जब वह कृति अस्तित्‍व में आ जाये। जहां कोई व्‍यक्ति जिसे भावी कृति में प्रतिलिप्‍याधिकार का संबंद्ध अनुज्ञपित्‍ इस धारा के अधीन अनुदत्‍त की गई है। उस कृति के अस्तित्‍व में आने से पहले मर जाता है वहां उसके विधिक प्रतिनिधि अनुज्ञप्ति में ततप्रतिकूल किसी उपबंध के अभाव में, उस अनुज्ञप्ति के फायदे के हकदार होगे। इस प्रकार धारा 30 प्रतिलिप्‍याधिकार स्‍वामी द्वारा लाइसेंस देने के बारे मे जो उपबंध करती है उसके बारे में निम्‍नलिखित बाते उल्‍लेखनीय है।
         लाइसेंस या तो किसी विद्यमान कृति में प्रतिलिप्‍याधिकार स्‍वामी द्वारा किया जा सकता है या किसी भावी कृति में प्रतिलिप्‍याधिकार का स्‍वामी होने वाले व्‍यक्‍त द्वारा किया जा सकता है अर्थात धारा 30 के अंतर्गत लाईसेंस दिया जा सकता है।
         विद्यमान कृति में प्रतिलिप्‍याधिकार के स्‍वामी (वर्तमान कृति) के वर्तमान प्रतिलिप्‍याधिकार स्‍वामी द्वारा व भावी कृति में प्रतिलिप्‍याधिका का स्‍वामी होने वाले व्‍यक्‍ति द्वारा (भावी कृति के प्रतिलिप्‍याधिकार स्‍वामी द्वारा) प्रतिलिप्‍याधिकार के वर्तमान स्‍वामी या भावी स्‍वामी द्वारा लाइसेंस द्वारा जो भी कार्य करने की अनुमति दी जाये वह लिखित में होनी चाहिए और लाइसेंस देने वाले व्‍यक्ति द्वारा या उसके सम्‍यक रूप से प्राधिकृत एंजेट द्वारा हस्‍ताक्षरित होना चाहिए। जहां भावी कृति कें प्रतिलिप्‍याधिकार के  स्‍वामी द्वारा लाइसेंस दिया गया है वहां ऐसा लाइसेंस तभी प्रभावी होगा जब वह कृति अस्तित्‍व में आ जाये। इसी प्रकार जहां भावी कृति में प्रतिलिप्‍याधिकार का स्‍वामी उस कृति कें अस्तित्‍व में अाने से पहले मर जाता है वहां उसके विधिक प्रतिनिधी उस लाइसेंसे के फायदे के हकदार होगे।
         यहां यह उललेखीय है कि जहां किसी कृति  के प्रतिलिप्‍याधिकार के एक से अधिक संयुक्‍त स्‍वामी है वहां वे संयुक्‍त रूप से प्रतिलिप्‍याधिकार के बारे में उसके किसी हित के बारे में लाइसेंस अनुदत्‍त कर सकते है। प्रतिलिप्‍याधिकार का कोई संयुक्‍त स्‍वामी बिना अन्‍य संयुक्‍त स्‍वामियों के सहमति के यदि लाइसेंस लेता है तो व्‍यथित पक्षकार प्रतिलिप्‍याधिकार के अतिलंघन के लिए बाद ला सकता है और लाइसेंस देने वाला संयुक्‍त स्‍वामी भी अन्‍य संयुम्‍त स्‍वामी

Hindi Dictation For High Court LDC Typing & SSC Mix Series Post-Steno-12 Mater Link 38 WPM - 40 WPM


कुल 385
समय 10 मिनिट

इस धारा का उद्देश्‍य दोषी व्‍यक्ति द्वारा अपराध के शिकार व्‍यक्ति को प्रतिकर देने तथा अभियोजन में उपगत व्‍ययों को चुकाने तथा उनकी भर्त्‍सना करने के लिए समुचित व्‍यवस्‍था करना है। दण्‍ड न्‍यायालय का कार्य अपराधी को दण्‍ड देना और (व्‍यवहार विषयक सिविल न्‍यायालय का कार्य) दोषकर्ता द्वारा विक्षुब्‍ध पक्षकार को कारित की गई क्षति अथवा हानि के लिए प्रतिकर दिलवाना है। तथापि यदि इन दोनों प्रक्रियाओं को सम्मिलित किया जा  सकता है उसके फलस्‍वरूप और दाण्डिक और व्‍यवहसर संबंधी आदेशिकाकाए प्रभावित नहीं करती तो ऐसा करना उचित और स्‍थकर होगा, क्‍योकि इससे दो भिन्‍न न्‍यायालयों में उपचार प्राप्‍त करने में समय और धन दोनो की बचत होगी। धारा 357 इसी लक्ष्‍य को लेकर आगे बढ़ती है।
         इस धारा के अधीन प्रतिकर का आदेश दिया जा सकता है, चाहे भले ही अपराध जुर्माने से दण्‍डनीय हो और जुर्माना दिनांक 23/03/2007 से वास्‍तविक रूप से लगाया गया हो परंतु ऐसे प्रतिकर का आदेश तभी दिया जा सकता है जब अभियुक्‍त को दोष मुक्ति प्रदान की गई हो। उसके विरूद्ध दण्‍डादेश पारित किया गया हो। प्रतिकर किसी भी हानि या क्षति के लिए देय हो सकता है, चाहे वह शारीरिक हो या अर्थ संबंधी प्रतिकर हो? न्‍यायालय को इस निमित्‍य क्षति की प्रकृति, क्षति की प्रणिति की रीति, अभियुक्‍त की भुगतान क्षमता और अन्‍य प्रासंगिक हेतुकों पर
उसे लेकर प्राथी सीईओ जनपद पंचायत शाहगढ़ दिनांक 02/08/17 को गया परंतु कार्यलय में पत्र नहीं पहुंचा इसके बाद जिला कलेक्‍टर कार्यलय सागर एवं मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सागर में पता लगाया गया। आज दिनांक तक प्रतिलिपी अप्राप्‍त है इस प्रकार मेरे द्वारा खोजबीन करने पर पता चला कि उक्‍त पत्र दिनांक 02/08/17 को डीईओं कार्यलय द्वारा डाक रजिस्‍टर पर चढ़ाकर शाहगढ़ भेजा गया है। मेरे द्वारा कोई आवेदन दिया जाता है। तो शिक्षा विभाग द्वारा कोई नया बखेड़ा खड़ा कर अड़न्‍गा लगाना इनकीनियति बन गई है अत: आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय एवं प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मध्‍यप्रदेशा शासन भोपाल के आदेशों के परिपालन में मेरा नियुक्ति आदेश देकर मेरे साथ न्‍याय प्रियता प्रदान करने की कृपा करने की दया करे। यदि प्रार्थी का एक सप्‍ताह में नियुक्ति आदेश नहीं दिया गया तो मजबूरन प्राथी डबल कोर्ट अवमानना हेतु माननीय उच्‍च न्‍यायालय की न्‍याय पाने हेतु शरण लेगा जिसका समस्‍त उत्‍तरदायितव्‍ आपका एवं शासन का होगा। 

55 WPM Hindi Dictation For High Court LDC Typing & SSC Mix Series


कुल 564
समय 10 मिनिट 30 सेकेंड

वर्ल्‍ड इॅकोनॉमिक फोरम के जेंडर गेप इंडेक्‍स में भारत 21 पायदान नीचे आ गया है। फोरम ने 144 देशों में भारत को 108वें नम्‍बर पर रखा है। पिछले साल 87वें नम्‍बर पर था स्त्री पुरूष में आर्थिक और राजनीतिक असमानता बढ़ना इसकी प्रमुख वजह है। फोरम चार पैरामीटरों पर यह रैंकिंग करता है। इनमें से दो में प्रदर्शन खराब हुआ है। बाकी दो पैमाने पर भी सिफ एक एक अंक का सुधार है। राजनीतिक अधिकार में  भारत पन्‍द्रहवे नम्‍बर पर है। अर्थव्‍यवस्‍था में महिलाओं की कम भागीदारी और मामूली वेतन के चलते भारत रैकिंग में चीन और बांग्‍लादेश से भी पिछड़ गया है। डब्‍ल्‍यू.ई.एफ की ग्‍लोबल जेंडल गैप रिपोर्ट 2017 के मुताबिक भारत ने महिला और पुरूषों के मामले में 67 फीसदी अंतर बांटने में सफलता हासिल की है। लेकिन यह सफलता  चीन और बांग्‍लादेश से भी फीकी है। इस इंडेक्‍स में बांग्‍लादेश 47वें और चीन 100वें स्‍थान पर रहा। भारत की रैकिंग 2006 के मुकाबले 10 पायदान गिरी है। यह इंडेक्‍स  2006 में ही शुरू किया गया था। इंडेक्‍स की शुरूआत से पहली बार पूरी दुनिया में जेंडर गैप के मामले में हालात सुधरने के बजाह बिगड़ी है। खासकर शिक्षा, कार्यस्‍थल और राजनीति इन चारो क्षेत्रों में महिला व पुरूषों के बीच खाई और चौड़ी हुई है।

         भारत 141वें स्‍थान पर है। भारत से नीचे सिफ 3 देश है अजर बेजान आर्मेनिया चीन। आश्‍चर्य जनक रूप से चीन सबसे नीचे है। भारत में पांच साल से कम की एक लाख बच्चिचयों में से 595 मर जाती है। 587 महिलाओं की मौत संकमण रोगों से होती है। भारत पन्‍द्रहवें स्‍थान पर है।
जो टेक्‍स देता है उसका टेक्‍स  भी देता हो जो टेक्‍स नहीं देता। यानी वो दोहरा कर देता है।  क्‍योंकि टेक्‍स तो देना ही है इसलिए साधन सम्‍पन्‍न आदमी जब साधन को जेब में रख लेता है तो यह अन्‍याय है। क्‍योंकि यह गरीब का हक है।
         राजनीतिक व्‍यवस्‍था में जब ज्‍यादा कैश होता है तो ये एक भ्रष्‍टाचार का केन्‍द्र और कारण बनता है। लेकिन, इस पर रोक लगाना कठिन हेाता है। सरकान ने एक के बाद एक कदम उठाये। एसआईटी ब्‍लेक मनी लॉ, विदेशों से रिटी को संशोधित करना ट्रांसपेंरेसी ज्‍यादा लाना। खर्च  किस तरह से उस पर कंडीशन लगाना, बेनामी कानून लाना। इन डारेक्‍ट व्‍यवस्‍था बदलना। इसके कई स्‍वाभाविक परिणाम हमने साल भर मे  देखे है। कैश का बैंको के अंदर जाना। इसलिए चाहे उसका एक्‍सपेंडेचर म्‍यूच्‍यूअल फंड में हो इन्‍श्‍योरेंस में हो। इस सब क्षेत्रों में अगर हम देखे तो पिछले एक साल मे रिसोर्स बड़े है। बैंको के पास पैसा आया। फार्मल इॅकोनामी में सुधार आया। नोटबंदी हर समस्‍या का हल नहीं है लेकिन, इसने एंजेडा बदला। इससे हमें देश को फार्मल इॅकानामी और लेस कैश की तरफ ले जाने में कामयाब हुई।‍ रिमानेटाईजेशन भी कुछ महीनों में कर दिया गया यह विशव के सामने अद्भुत उदाहरण है।
         कांग्रेस की तरफ से विशेष रूप से विरोध किया गया दस साल तक पॉलिसी पैरालिसिस था कुछ नहीं किया गया। प्रधानमंत्री जी ने एक स्‍ट्रकच्‍लरल रिफार्म करके बदलाव लाने का प्रयास किया है। जेटल जी ने कहा, यूपीए और एनडीए में एक मूलभूत अंतर है। एक जगह पॉलिसी पैरालिसिस दिखता है जो दूसरी तरफ स्‍ट्रक्‍चरल रिफार्म । हैरानी इस बात की है कि हम नैतिक रूप से सही कदम उठा रहे है। और उसको लूट कहना।
         हमने काले धन के खिलाफ कार्यवाही की यह सैदांतिक तौर पर सही है।




48 WPM Hindi Dictation For High Court LDC Typing


कुल 480
समय 10 मिनिट

धरती पर मानव जाति का बजूद आदमी और औरत दोनों की समान भागीदारी कि बिना असंभव है। किसी भी देश के विकास के लिए नर और नारी दोनों ही समान रूप से जिम्‍मेदार है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि महिलाएं पुरूषों से अधिक महत्‍व रखती है। औरतों के बिना हम मानव जाति की निरंतरता के बारे में  नहीं सोच सकते क्‍योंकि वो मानव को जन्‍म देती हैं। इसलिए कन्‍या शिशु को नहीं मारा जाना चाहिए उनहें आगे बढ़ाने के लिए सुरक्षा सम्‍मान और समान अवसार प्रदान किए जाने चाहिए। हालांकि महिलांए हत्‍या और दहेज प्रताड़ना आदि से अपनी ही बनाई गई सभ्‍यता में पीढि़त है। यह कितना शर्मनाक है। बहुत से समझदार लोगों के अनुसार एक शिशु कन्‍या को अनेक कारणों के लिए बचाया जाना चाहिए, जैसे कोई भी लड़की किसी भी क्षेत्र में लड़कों की तुलना में कम सक्षम नहीं है और अपना सर्वश्रेष्‍ठ देती है। 1961 से कन्‍या की गर्भ में ही हत्‍या करवा देना एक गैर कानूनी अपराध है। यह ही नहीं, लिंग परीक्षण चुनाव के बाद गर्भपात को रोकने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। किसी लड़के से तुलना करे तो यह अवश्‍य
हिमाचल में ऐसा चुनाव नहीं देखा जैसा इस बार है। साफ पता चल रहा है कि हवा का रूख किस तरफ है। इस बार देख रहा हूं कि हवा का रूख जानने  पहचानने की जरूरत नहीं, यहां तो आंधी चल रही है।

         मोदी ने कहा ‘’भ्रष्‍टाचार के खिलाफ यहां जनता का गुस्‍सा फूट पड़ा है। इस बार अठारह दिसम्‍बर को हम सब को कहना पड़ेगा हिमाचल का चुनाव ना बीजेपी का लड़ता है ना ही कार्यकर्ता और ना ही विधायक उम्‍मीदवार लड़ता है, यहां का चुनाव यहां की जनता लड़ती है लोकतंत्र में जय पराजय होते रहते है। यह लोकतंत्र का उत्‍सव है। मुझे इस चुनाव में एक बार की पीढ़ा बनी रहेगी मजा नहीं आ रहा है क्‍योंकि कांग्रेस पार्टी मैदान छोड़कर भाग गई। देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री कहते थे कि दिल्‍ली से 1 रूपया चलता है लेकिन जनता के पास पन्‍द्रह पैसे पहुचते है। आखिर वो कौन सा पंजा था जो ऐसा करता था। आधार से सिलेंडर को जोड़ा मोदी जी ने कहा कि हमने आधार के साथ सिलेंडर को जोड़ा और देश की करोड़ो रूपए की चोरी होने से बचा दी। कई जगह जो ऐसा नजर आया कि स्‍कूल में टीचर की तन्‍ख्‍वाह जा रही है लेकिन ना तो टीचर है और ना ही इस नाम का कोई व्‍यक्ति जब आधार से जोड़ना शुरू किया तो पता चला कि जो पैदा ही नहीं हुए थे वे भी तन्‍ख्‍वाह ले रहे थे। लाखों नाम ऐसे हैं कि जो बेटी जन्‍मी हीं नहीं वह विधवा हो गई और दिल्‍ली से सब्सिडी का पैसा जा रहा है आपकों प्रसन्‍नता होगी कि आप हिमाचल के लोगों ने लोक सभा के सीटें जिता कर मोदी को प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन काम दम से करना है। 


Hindi Dictation For High Court LDC Typing


कुल 473
समय 10 मिनिट

Hindi Dictation For High Court LDC Typing & SSC Mix Series 47 WPM - 47 WPM Post-Steno-9 Mater Link

जोसेफ हेलर के प्रसिद्ध उपन्‍यास केच-22 में लेफिटिनेंट माइलो मांईडर वांईडर का चरित्र खुद से कारोबार करके ख्‍याति अर्जित करता है वह खुद से इस तरह कारोबार करता कि लेनदेन के चक्र में शामिल हर व्‍यक्ति को मुनाफा होता तो अंतत: सरकार की जेब से ही आता है। वह किसी चीज की पूरी सप्‍लाई खरीद लेता जैसे एक गांव के सारे अंडे टमाटर खरीद लिए और फिर अपनी ही फौजी यूनिट को मनमाने दाम पर बेंच दिए। अफवाद सिफ एक था जब उसने दुनिया का सारा मिस्‍त्री कपास खरीद लिया। कोई खरीददार ही नहीं बचा किसी ने उससे खरीदा तो उसे ही वापस भेज दिया। मोनोपॉली व्‍यापारी बनकर उसने मिस्‍त्र कपास का बाजार खत्‍म कर दिया जिसमें वह स्‍वयं भी था पर उसने रास्‍ता निकाल ही लिया कि क्‍यों ना इसे सरकार को बेच दिया जाए। अब माइलो मांईडर वांईडर की जगह 1979 के बाद की भारत सरकार और मिस्‍त्री कपास की जगह भारतीय बैंक लाईये। इदिरा गांधी पहले तो भारत के प्रमुख बैंको का राष्‍ट्रीयकरण करती है और बैंकिंग तथा फाइनेंस में राज्‍य का एकाधिकार स्‍थापित करती है। क्‍योंकि इसके पास सारी बीमा कंपनियों व विकासात्‍मक वित्‍तीय संस्‍थानों (पूर्ववर्ती आईसीआईसीआई, आईडीबीआईआईएफसीआई आदि) का भी स्‍वामित्‍व है। फिर यह खुद से खरीदना शुरू करती है। बैंको को अपने ही बॉन्‍डस में निवेश करवाती है; अपने ही प्रोजेक्‍ट और सार्वजनिक उपक्रमों को ऋण दिलवाती है, लोन मेला लगाती है
करया दिया गया हो जो अपना कथन करने में अस्‍मर्थ और साक्षी द्वारा कथन के अधार पर सायम काल सात बजे प्रथम सूचना रिपोर्ट दाखिल की गई हो प्रतिरक्षा पक्ष द्वारा यह दलील दी गयी हो कि अभियोजन साक्षी के अनुसार स्‍टेशन गई थी जहां अपराध के शिकार व्‍यक्ति द्वारा रिपोर्ट की गई ततपश्‍चात विचारण न्‍यायालय द्वारा साक्षी काउक्‍त कथन जो कि एक विभ्रम की ओर किया गया प्रतीत होता है। उक्‍त धारा 439-1 के अधीन जमानत पर विस्‍तार के विषय में विनिश्चित करते समय न्‍यायालय को सुसंगत हेतुकों पर विचार करना अपेक्षित है। उच्‍च न्‍यायालय के आदेश से यह प्रकट होना चाहिए कि जब वह जमानत की प्रार्थना पर राय का निर्माण कर रहा था तब वह उन कारणों के प्रति सजग और सतर्क था जो सृजनशीलता द्वारा जमानत की प्रार्थना को खारिज करने के लिए व्‍यक्‍त किए गए थे। वर्तमान प्रकरण एक ऐसा ही मामला था जिसमें ऐसी परिस्थितियां अतरविलित थी जिनमें जमानत मंजूर करने के लिए विशेष कारणों की अपेक्षा का पुर्नविलोकन करने की अपेक्षा अंतरग्रस्‍त थी। प्रकरण के तथ्‍यों और अभियुक्‍त के पूर्व इतिहास तथा इतिवृत्‍तों पर विचार करते हुए जमानत को अस्‍वीकृत कर दिया था। उच्‍च न्‍यायालय द्वारा ऐसी किसी बात को उल्लिखित किए बिना ही क्‍यों वह आदेश के विरूद्ध राय का निर्माण कर रहा हैजमानत को मंजूर करना एक गलत विनिश्‍चय था। धारा 439 के अधीन जमानत रद्ध करने का प्रश्‍न विनिश्चित रूप से जमानत की संस्‍वीकृति के प्रश्‍न से भिनन है। 

45 WPM Hindi Dictation For High Court LDC Typing & SSC Mix Series Post-Steno-8 Mater Link


कुल 465
समय 10 मिनिट

20/02/1996 की घटना होकर 29 तारीख को न्‍यायालय के समक्ष पहुंचा हो यह अभियोजन से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि मजिस्‍ट्रेट को प्रथम सूचना रिपोर्ट के घंटे विलय का वह स्‍पष्‍ट करे परंतु तत्‍समय विद्यमान परिस्थिति के अंतर्गत उसे  यथा संभव युक्तियुक्‍त समय के भीतर अवश्‍य भेंज देना चाहिए। अत: जहां कोई रिपोर्ट दिन में बारह बजे दाखिल की गई है और प्रकरण के तथ्‍यों और परिस्थितियों कें संदर्भ में तथा पुलिस थाने पर पुलिस बल की पर्याप्‍त संख्‍या के अभाव को ध्‍यान में रखकर यदि उसे शाम छह बजे भेज दिया जातावहां यह नहीं कहा जायेगा कि विलंब किया गया।
         इस संहिता की धारा 157-1 में प्रयुक्‍त तत्‍काल शब्‍द का तात्‍पर्य निसंदेह केवल यह है कि एक युक्तियुक्‍त संदेह के भीतर और बिना किसी अयुक्तियुक्‍त विलबं उसे मजिसट्रेट को अग्रसारित कर देना चाहिए। फिर भी उसकी प्रति को तत्‍काल नहीं भेजा जाता तो केवल इसी कारण अभियोजन का संपूर्ण प्रकरण संदेहपूर्ण नहीं बन जाता अपितु इस बजह से न्‍यायालय को सतर्क हो जाना पड़ता है और विलंक का स्‍पष्‍टीकरण जानने का प्रयास करना होगा यदि नहीं किया जाता तो यह सावधानी रखनी चाहिए। निर्दोष व्‍यक्तियों को मिथ्‍यापूर्ण ढंग से नही फसाया गया है।

         जहां घटना प्रात: दस बजे के लगभग घटित हुई हो और क्षतिव्‍यक्ति को  अस्‍पताल में इसका वोट खरीदने का विजनेस बना जाता है। इस प्रक्रिया में बैंक दिवालिया होते रहते है। चूंकि सारे बैंक सरकारी है तो उनहें नाकाम नहीं होने दिया जा सकता और सरकार के पास टेक्‍स लगाने और नोट छापने के अधिकार है। इसलिए सरकार फिर अपनी ही बैंके खरीदती है । रिकेपीटलाईजेशन से बैंकों से आप बान्‍ड जारी करवा सकते है। जिसकी मदद से  आप अन्‍य कंपनियां जैसे अतिरिक्‍त नगदी बाले सार्वजनिक उपक्रमों को खरीद सकते है। अब मुझे बताईयें की क्‍या हमारी माइलों माइंडर बाइंडर से भी ज्‍यादा चतुर पूंजीवादी नहीं है? यदि उसका इकोनामिक कैच-22 था तो भारत सरकार का कैच-23 होगा।

         आपकों यह पूछने की इच्‍छा हो सकती है कि कैच-22 का मेरा यह व्‍यंग बैंकों को उबारने के लिए नवीनतम कार्यक्रम की मेरी सराहना से कैसे मिलता है। यह अच्‍छा कार्यक्रम है क्‍योंकि मौजूदा परिस्थितियों में यहीं संभव था यदि आप डॉक्‍टर है और अस्‍थमा के भीषण के अटैक में आपके रोगी का दम घुट रहा हो तो पीर में साईड अफेक्‍ट की परवाह किए बिना स्‍टेराईड पंप करने के अलावा आप क्‍या करेंगे? 70 फीसदी बैंकिंग सरकारी हो, वे दिवालिया होने के करीब हो तो आप क्‍या करेंगे? फंड खड़ा करने के लिए बान्‍ड जारी करने का आईडिया चतुराई भरा है। लेकिन अब नगदी से मालामाल अन्‍य सार्वजनिक उपक्रम, जिनमें ज्‍यादातर ऊर्जा की मोनोपाली है को यह बान्‍ड खरीदने को कहा जायेगा यह विचलित करने वाली बात है।  हम इतने भी नासमझ नहीं है कि उनसे इंदिरा गांधी की सबसे खराब विरासत, बैंको के राष्‍ट्रीयकरण को उलटने की मांग करे।



70 WPM

चेयरमेन साहब मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि हम लोग देख रहे है कि गरीबी सबके लिए नहीं है कुछ लोग तो देश में इस तरह से पनप रहे है‍ कि उनकी संपत...