Saturday, 28 April 2018

37 WPM


वर्तमान मामले में याचिकाकारी 10 नवम्‍बर, 20005 को फाईल की गई थी किंतु यह याचिका आदेश सुनवाई के लिए तारीख 14 नवम्‍बर 2005 को न्‍यायालय के समक्ष प्रस्‍तुत की गई थी। याची संख्‍या 2 को तारीख 9 नवम्‍बर 2005 को गिरफ्तार किया गया था। अत: जब न्‍यायालय द्वारा याचिका पर विचार किया गया तब तक निरूद्ध व्‍यक्ति पहले ही सिविल कारागार से छूट चुका था। याचिका में कोई वाद हेतुक नहीं रह गया था। अत: अवैध निरोध के लिए प्रतिकर का दावा करने के लिए फाईल संशोधन आवेदन इस आधार पर ही खारिज किए जाने योग्‍य है कि जब तारीख 14 नवम्‍बर, 2005 को याचिका आदेश के लिए प्रस्‍तुत की गई तब तक निरूद्ध व्‍यक्ति को पहले ही छोड़ा जा चुका था। और संशोधन पर इस कारण विचार नहीं किया जा सकता क्‍योंकि वाद हेतुक पहले ही समर्थ हो गया था। यदि बहस के लिए यह मान भी लिया जाये कि याचिका उस समय ग्राह्रय थी जब आदेश के लिए उसे प्रस्‍तुत किया गया था तब भी प्रतिकर का दावा करने के लिए संशोधन आवेदन इस आधार पर अनुज्ञात नहीं किया जा सकता कि निरूद्ध व्‍यक्ति के पास न्‍यायालय फीस का संदाय करने के पश्‍चात प्रतिकर के लिए वाद फाईल करने का समान उपचार उपलब्‍ध था। और इसलिए वर्तमान मामले के तथ्‍यों और परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए इस रिट अधिकारिता का अवलंब लेना उचित नहीं है। याचिओं कें विद्यवान अधिवक्‍ता द्वारा अवलंब लिए गए मामले अवैध अभिरक्षा में यातना से संबंधित थे। किंतु वर्तमान मामले में ऐसा कोई परिस्थितिजन्‍य कारण नहीं आया। याची को  मात्र वसूली मांगों के अनुसरण में सिविल कारागार में निरूद्ध किया गया था और उसे उसकी गिरफ्तारी से अगले दिन ही छोड़ दिया गया था। जब प्रत्‍यर्थीयों को यह पता चला कि मांग सूचनाओं कें प्रवर्तन को रोक लगाने वाला आदेश पारित कर दिया गया है।
   संपूर्ण साक्ष्‍य तथा तथ्‍यों पर विचार करने के पश्‍चात और कानूनी स्थिति की समीक्षा करने के उपरांत हम इस मत पर आये है कि अभियुक्‍तगण को चौहान की मृत्‍यु कारित करने के अपराध के लिए धारा 304 भाग-2 भारतीय दण्‍ड संहिता सहपठित धारा 149 भारतीय दण्‍ड संहिता के अंतर्गत 5-5 वर्ष के कठोर कारावास का दण्‍डादेश एवं 10-10 हजार रूपए के अर्थदण्‍ड से दण्डित करना उचित होगा।


42 WPM


अभियुक्‍त चेक राशि एवं न्‍यायालय द्वारा संगणित ब्‍याज और प्रतिकर राशि न्‍यायालय में जमा जमा करने हेतु तत्‍पर था, तब माननीय सर्वोच्‍य न्‍यायालय ने व्‍यक्‍त किया है कि यदि अभियुक्‍त न्‍यायालय द्वारा संगणित प्रतिकर ब्‍याज राशि विचारण के दौरान जमा कर देता है तो न्‍यायालय वह राशि जमा हो जाने पर धारा 258 दण्‍ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कार्यवाही रोक सकता है जिसका परिणाम उन्‍मुक्ति होगा। इस प्रकरण में ऐसी स्थिति प्रकट नहीं होती है। ब्‍याज राशि भी अभियुक्‍त ने न्‍यायालय द्वारा निर्णय पारित किए जाने के पश्‍चात निर्णय में दिए गए निर्देशानुसार जमा की है। विचारण न्‍यायालय के समक्ष कार्यवाही पूर्ण हो चुकी थी और निर्णय पारित हो चुका था। ऐसी स्थिति में धारा 258 दण्‍ड प्रक्रिया संहिता के अनुसार कार्यवाही संभव नहीं है। अत: तथ्‍य भिन्‍न होने से यह न्‍यायदृष्‍टांत अभियुक्‍त को सहायक नहीं है।
       इस न्‍यायालय में पुनरीक्षण के आधार यह दिए गए है कि अभियुक्‍त वाहन का पंजीकृत स्‍वामी है और आवेदक वादी साक्षी उक्‍त वाहन का मुक्‍तारनामा होने के नाते संचालन कर रहा था। आवेदक अनाज का व्‍यापारी है और वह अनाज को बाजार से क्रय कर विक्रय करने के लिए ले जा रहा था। विचारण न्‍यायालय के समक्ष आवेदक ने अनाज की क्रय रशीदे प्रस्‍तुत की थी। इन तथ्‍यों पर विचारण न्‍यायाल ने ध्‍यान ना देकर त्रुटि की है विचारण न्‍यायालय ने अपराध की पुनरावृत्ति के आधार पर आवेदन निरस्‍त करने में त्रुटि की है। जिला दण्‍डाधिकारी द्वारा वाहन को राजसात करने की कार्यवाही प्रारंभ कर देने के आधार पर विचारण न्‍यायालय ने आवेदन निरस्‍त किया है, जबकि खाद्रय एवं अनाज प्रतिशेध अधिनियम एवं जप्‍ती निवारण अधिनियम में राजसात किए जाने की कार्यवाही की सूचना मिलने पर न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी के सुपुर्दगी संबंधी अधिकार प्रभावित नहीं होते है।
       वाहन थाने में खुले में पढ़ा है, जिसके क्षतिग्रस्‍त होने की संभावना है। अत: पुनरीक्षण स्‍वीकार कर विचारण न्‍यायालय का आदेश निरस्‍त करने एवं उक्‍त वाहन पुनरीक्षकर्ता को सुपुर्दगी में दिए जाने की मांग की गई है।
       निरीक्षणकर्ता के विद्यवान अभिभाषक द्वारा प्रस्‍तुत माननीय मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय द्वारा पारित आदेश की प्रतिलिपी के अनुसार यह स्थिति स्‍पष्‍ट है कि खादय एवं अनाज प्रतिशेश अधिनियम के अंतर्गत आवकारी अधिनियम के अनुरूप ऐसा प्रावधान नहीं है कि जिला मजिस्‍ट्रेट द्वारा वाहन के राजसात की कार्यवाही प्रारंभ कर देने की सूचना मिलने पर न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी को अंतरिम सुपुर्दगीनामा पर वाहन देने का अधिकार नहीं रहता है परंतु इस प्रकरण में विद्यवान न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी द्वारा आवेदक का सुपुर्दगीनामा आवेदन इस आधार पर निरस्‍त नहीं किया है कि जिला मजिस्‍ट्रेट द्वारा वाहन के राजसात की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई थी।

44 WPM Hindi



आवेदक के द्वारा यह क्‍लेम याचिका मोटर दुर्घटना के परिणाम स्‍वरूप स्‍थाई निर्योग्‍यता उत्‍पन्‍न होने के आधार पर कुल दो लाख रूपए प्रतिकर दिलाए जाने हेतु प्रस्‍तुत की गई है। आरोपी पर भारतीय दण्‍ड विधान की धारा 363 एवं 366 एवं पास्‍कों एक्‍ट की धारा 5 के अंतर्गत दण्‍डनीय अपराध के आरोप है कि उसने दिनांक 26 फरवरी 2015 को शाम 4 बजे ग्राम इंदौर से अभियोत्री को उसकी विधिपूर्ण व्‍यपहरण अथवा विवाह के लिए विवश किया। एवं उसके साथ बार-बार बलात्‍संग किया एवं अभियोत्री को भगाकर ले जाकर लैंगिंक हमला कारित किया।
       न्‍यायदृष्‍टांत विरूद्ध मध्‍यप्रदेश राज्‍य 2007 एवं में माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया है कि जहां जप्‍तीकर्ता अधिकारी ने इस तथ्‍य को साबित नहीं किया कि कैसे जुआं खेला गया, जुएं के खेलने की प्रक्रिया स्‍पष्‍ट नहीं की गई, केवल कुछ पर्ची एवं करेंसी नोट अभियुक्‍त के कब्‍जे से            जप्‍त किए गए। स्‍वतंत्र साक्षी पक्ष विरोधी हुए उनसे जप्‍ती साबित नहीं हुई। शेष पुलिस साक्षी जप्‍तीकर्ता पुलिस अधिकारी के सहायक थे ऐसे में धारा    4 के मामले में प्रमाणित नहीं माना गया।
       सार्वजनिक द्रूत अधिनियम की धारा 4 के अनुसार खेल के अन्‍य रूप से संबंधित अंको और तस्‍वीरों को मुद्रित करने अथवा प्रकाशित करने के लिए दण्‍ड जो कोई खेल के किसी अन्‍य रूप को किसी शीर्ष के चाहे जो कुछ भी हो अधीन अथवा किसी रूप की युक्ति को स्‍वीकार करके किसी अंकों, प्रतीकों अथवा तस्‍वीरों अथवा ऐसी किसी भी दो अथवा ऐसे अंकों, प्रतीकों अथवा तस्‍वीरों अथवा उनमें से किन्‍हीं दो अथवा दो अथवा उससे अधिक के संयोजन से संबंधित सूचना को आत्‍मसात करेगा। अथवा आत्‍मसात करने का प्रयत्‍न करेगा। आत्‍मसात करने का दुष्‍प्रेरण करेगा ऐसे कारावास से जो छह मास तक का हो सकेगा। और ऐसे जुर्माने से जो एक हजार रूपए कि सीमा तक हो सकेगा, दण्‍डनीय होगा।
       केस डायरी का अवलोकन किया गया। आरोपीगण से उनकी गिरफ्तारी के संबंध में पूछा गया। आरक्षीकेन्‍द्र कोतवाली द्वारा  आरोपीगण को गिरफ्तार किए जाने की  सूचना दिए जाने का उल्‍लेख किया गया तथा आरोपीगण द्वारा भी उनकी गिरफ्तारी की सूचना उनके       परिजनों को होना बताया।
       संबंधित अपराध में विहित अवधि के दौरान चालानी कार्यवाही पूर्ण नहीं होने से आरोपी का न्‍यायिक रिमाण्‍ड दिनांक 29 जनवरी 2016 तक स्‍वीकार किया जाता है। उक्‍त दोनों आरोपीगण को न्‍यायिक अभिरक्षा में लिया जाकर जेल वारंट द्वारा केन्‍द्रीय जेल भेजा जावे। आरक्षी केन्‍द्र को निर्देशित किया जाता है कि वे आगामी अभियोग पत्र प्रस्‍तुति की कार्यवाही संबंधित न्‍यायालय के समक्ष प्रस्‍तुत करे।
       केस डायरी के अवलोकन से विदित होता है कि एक अन्‍य अपराध पंजीबद्ध अंतर्गत आरक्षीकेन्‍द्र कोतवाली में चोरी गया सामान बरामद करना है एवं पूछताछ करनी है जिसके लिए पुलिस रिमाण्‍ड चाहा गया है।

40 WPM


अभियोजन पक्ष कथन के अनुसार, हमलावरों का मुखिया अपीलार्थी रघुवीर सिंह मोतीसिंह की हत्‍या की घटना कारित करने के लिए घटन स्‍थल पर निहत्‍था गया था। उसने वहां पड़ी हुई एक ताडी उठाई और इससे मोतीसींग पर बार किया।  यह बात उचित नहीं लगती है कि हमलावरों का मुखिया, रघुवीर सिंह हत्‍या कारित करने के लिए निहत्‍था गया था। इससे घटना स्‍थल पर उसकी मौजुदगी संदेहास्‍पद हो जाती है। अभियुक्‍त द्वारा लिया गया चाकू और अभियुक्‍त द्वारा ली हुई छड़ी घटना स्‍थल से रक्‍त रंजित अवस्‍था में बरामद किए गए थे। कोई भी अपराधी घटना स्‍थल पर अपने आयुध को छोड़ने की भूल नहीं करेगा। अभियुक्‍त व्‍यक्तियों की संख्‍या 13 थी। यहां अजीब बात है कि उनके पास मोतीसिंह को अनावश्‍यक रूप से गांव ले जाने के लिए तो पर्याप्‍त समय था किंतु अपने ही आयुधों को उठाने का उनके पास समय नहीं था। अपीलाथियों पर ऐसा कोई दबाव नहीं था जिसकी वजह से उन्‍हें घटना स्‍थल पर अपने आयुधों चाकु और छड़ी को घटना स्‍थल पर छोड़ दिया था, ना तो प्रथम इत्तिला रिपोर्ट में उल्‍लेख किया गया है और ना ही इसका स्‍पष्‍टीकरण दिया गया है।
       इससे भी अभियोजन के वृत्‍तांत पर संदेह पैदा होता है। कुल्‍हाड़ी अभियुक्‍तों की नहीं थी और यह घटना स्‍थल से बरामद भी नहीं हुई थी। प्रथम इत्तिला रिपोर्ट में ऐसा कोई उल्‍लेख नहीं है कि इसे अभियुक्‍तों में से किसी अभियुक्‍त द्वारा ले जाया गया था।  किसी भी साक्षी ने यह स्‍पष्‍टीकरण नहीं दिया है कि यह कुल्‍हाड़ी कहा चली गई। कुल्‍हाड़ी के गुम हो जाने की बावत् कोई स्‍पष्‍टीकरण नहीं दिया जाना अभियोजन के विरूद्ध जाता है।
       हमारे मत में अभियोजन अपीलार्थीगण के विरूद्ध अपना केस अर्थात पक्ष कथन युक्तियुक्‍त संदेह से परे सिद्ध करने में सफल हुआ है। प्रत्‍यक्षदर्शी विश्‍वसनीय साक्षी है। उनके द्वारा अभियुक्‍तगण को झूठे एवं मिथ्‍या रूप से फसाने का कोई कारण नहीं है। प्रत्‍यक्षदर्शी साक्षियों कें साक्ष्‍य में सामजस्‍य है। मात्र साक्षी संख्‍या 1 गुलाब चौहान ने भाले वाले तीसरे अभियुक्‍त का नाम सतीश के स्‍थान पर अंबिका बता दिया। ऐसा प्रतीत होता है कि जुबान की त्रुटि से वह        ऐसा कह गया। साक्षी क्षतिग्रस्‍त था। अन्‍य सभी साक्षियों ने तीसरे भाले वाले अभियुक्‍त का नाम सतीश ही बताया है। साक्षी गुलाब चौहान की उपरोक्‍त त्रुटि नजरअंदाज किए जाने योग्‍य है।  उनके साक्ष्‍य व चिकित्‍सकीय साक्ष्‍य में भी सामजस्‍य है।

43 WPM


निसहाय स्‍त्रीया सदैव ही सांतवापूर्ण शब्दों  और सद्भावनापूर्ण प्रदर्शन के लिए अपने पतियों की ओर देती है। अभियुक्‍त ने उसे सांतना देने और उसकी मानसिक परेशानी और तनाव को दूर करने के बजाह वह वैवाहिक बंधन तोड़ने का प्रयास किया जो उस समय तक उन्‍हें उनके वैवाहिक जीवन से बांधे हुए था। पवित्र मंगल सूत्र ऐसी किसी हिंदु पत्नि के लिए संरक्षकता का एक मजबूत साक्ष्‍य होता है जिसे कि वह अपने वैवाहित बंधन के अत्‍यंत पवित्र सूत्र के रूप में समझती है। अभियुक्‍त द्वारा उसकी इस पवित्र चैन को अभ्रदापूर्वक और बर्बरता पूर्वक खीचा गया था और इस प्रकार अभियुक्‍त ने उसको अनियंत्रित मानसिक आघात और तीव्र व्‍यथा कि स्थिति में छोड़ दिया था किसी विश्‍वसनीय हिंदु पत्नि के लिए उसके पति द्वारा मंगल सूत्र को खीचने का यह अर्थ है कि वह विधवा हो गई थी। और उसके पास अपने जीवन को समाप्‍त करने के सिवाय और कुछ चारा नहीं रह गया था। अत: अभियुक्‍त का यह कार्य स्‍पष्‍टत: इस प्रकार के स्‍वैच्‍छिक आचरण या उसके परिधी के अंतर्गत आता है जो उसको अपनी जीवन लीला समाप्‍त करने के लिए प्रेरित करे।
     भारतीय दण्‍ड संहित की धारा 498-क के स्‍पष्‍टीकरण के अंतर्गत स्‍वैच्छिक आचरण के समान सभी कार्यों का जिनसे क्रूरता गठित होती हो, उल्‍लेख करना यदि असंभव नहीं है तो कठिन अवश्‍य है। यह भी  संभव नहीं है कि ऐसे कार्यों को किसी कठोर सूत्र की परिभाषा के भीतर रखा जाए। सभी स्त्रियां एक जेसी नहीं होती कुछ स्‍ित्रियां साहसी और कुछ शाही होती है और इतनी दृण निश्‍चयी होती है कि अंत तक अमानवीयता और शारीरिक तथा मानसिक कष्‍ट को सह सके। तथापि कुछ स्त्रिया ऐसी होती है जो अत्‍यंत कमजोर, कमजोर दिमाग, डरपोक और अत्‍यंत भावुक होती है कि वे मामूली तकलीफ, उपहास या सांकेतिक भाषा से उग्र प्रतिक्रिया करती है ऐसे तीसरे प्रवर्ग की स्त्रिया भी होती है जो कष्‍ट पूर्वक आघात को सह लेती है उंचे दर्जे की सहनशीलता उपदर्शित करते हुए और खामोशी से अमानवीयता को तब तक सहन करती रहती है जब तक कि स्थिति विस्‍फोटक ना हो जाये। अंतिम प्रवर्ग की स्त्रिया अपने वैवाहिक जीवन से संबंधित विशाद पूर्ण अध्‍याय को दूसरों पर प्रकट करना पसंद नहीं रखती है सिवास उन व्‍यक्तियों कें जिनमें वे पूरा विश्‍वास और भरोसा रखती है। न्‍यायालयों द्वारा दामपत्‍य दबाव में विशिष्‍ट स्‍त्री की सहनशीलता के बारे में विचार ऐसे अपराधो का विचारण करते समय किया जायेगा। ऐसा ही आचरण जो वर्तमान मामले में धारा द्वारा उपबंधित क्रूरता के बराबर हो सकता है दूसरे मामले में क्रूरता के समान नहीं हो सकता जो समाज के किसी वर्ग के लिए पूर्णत: उचित हो।

48 WPM


मुझे खेद है कि मैं उपर्युक्‍त दलीलों से सहमत नहीं हो सकता। अभियोजन साक्षी 3 ने जो उसकी माता है, दृणतापूर्वक न्‍यायालय के समक्ष यह अभिसाक्ष्‍य दिया है‍ कि यद्धपि वह जीवन से उदासीन थी क्‍योंकि उसके कोई बच्‍चा उत्‍पन्‍न नहीं हो सका था। तथापि इस बात ने उसे आत्‍महत्‍या करने के लिए प्रेरित नहीं किया। इसके अतिरिक्‍त उसकी गर्भधारण की अक्षता ऐसी जल्‍दबाजी में आत्‍महत्‍या करने के लिए तुरंत प्रकोपन गठित नहीं कर सकती।
      इसके प्रति‍कूल उसकी चाची के मकान में घटित घटना से जैसा कि अभियोजन साक्षी चार और पांच ने बताया है स्‍पष्‍टत: यह उपदर्शित होता है कि अभियुक्‍त उसकी तलाश में अभियोजन साक्षी 5 के मकान तक आया था और उसने उससे वहां मिलने के पश्‍चात मकान के पिछले भाग में झगड़ा किया था। वह उस मकान में अपनी चाची की जो अभियोजन साक्षी 5 की माता थी, मृत्‍यु पर चालीसवीं के समारोह में आई थी। अभियुक्‍त अपनी पत्नि से जो उस मकान में खाना तक नहीं खा सकी। झगड़ा करने के पश्‍चात उसे उस मकान से घसीटते हुए ले गया था।  यह घटना अभियोजन साक्षी 4 और अभियोजन साक्षी 5 ने देखी थी। अभियोजन साक्षी 5 ने उसको अपने मकान में  वापस आने और तत्‍पश्‍चात खाना खाकर जाने के लिए कहा था उसने रास्‍ते में यह देखा कि अभियुक्‍त और उसके बीच झगड़ा हो रहा है और अभियुक्‍त बल पूर्वक उसकी खाली चैन छीन रहा था यह घटना एएलपी स्‍कूल के निकट हुई थी घटना उसके मकान के रास्‍ते में हुई थी और उसने स्‍कूल अहाते में स्थि‍त कुएं में कूंदकर अपनी जीवनलीला समाप्‍त कर ली थी अभियुक्‍त ने अपनी पत्नि के आत्‍म हत्‍या करने के आचरण के बारे में जानकारी होने पर साक्ष्‍य बनाने के लिए मकान की खिड़की से जिस पर किवाड़ नहीं था। मेज पर खाली चेन अर्थात मंगल सूत्र फेंक दी। अभियुक्‍त द्वारा ऐसा स्‍वयं को बचाने के लिए और निदोष साबित करने के लिए किया गया था। यदि किसी दण्‍ड न्‍यायालय के समक्ष हाजिर होने के लिए समन किए जाने पर कोई साक्षी शमन के पालन में किसी निश्चित स्‍थान और समय पर हाजिर होने के लिए वैध रूप से आबद्ध है और न्‍यायसंगत कारण के बिना उस स्‍थान पर या समय पर हाजिर होने में उपेक्षा या हाजिर होने से इंकार करता है। अथवा उस स्‍थान से, जहां उसे हाजिर होना है, उस समय से पहले चला जाता है जिस समय चला जाना उसके लिए विधिपूर्ण है और जिस न्‍यायालय के समक्ष उस   साक्षी को हाजिर होना है उसका समाधान हो जाता है कि न्‍याय के हित में यह समीचीन है कि ऐसे साक्षी का संक्षेपत: विचारण किया जाये तो वह न्‍यायालय उस अपराध का संज्ञान कर सकता है। और अपराधी को इस बात का कारण दर्शित करने का कि क्‍यों ना उसे इस धारा के अधीन दण्‍डित किया जाये। अवसर देने के पश्‍चात उसे 100 रूपए से अनधिक जुर्माने का दण्‍डादेश दे सकता है।

Friday, 27 April 2018

100 WPM HINDI


माननीय अध्‍यक्ष जी मैं इस बजट का समर्थन करता हूँ लेकिन समर्थन करते हुए एक दो बाते कहना उचित समझता हूं इस संशोधन के जरिए चाय के बागानों में   काम करने वाले मजदूरों कें हित संबंधी विषयों पर चर्चा की गई है। उनको हर प्रकार की सुविधाएं दिए जाने की बात का तो कोई भी व्‍यक्ति विरोध नहीं कर सकता है। सब लोग समर्थन ही करेंगे। यह अच्‍छा होता कि जितने बागान है यदि सरकार उन्‍हे अपने कब्‍जे में कर ले तो इससे मजदूरों का ज्‍यादा भला हो सकता था लेकिन अभी तक इतने साल बीत जाने के बाद भी ऐसा कुछ होता हुआ नहीं दिख रहा है। इस विषय पर चर्चा करते हुए मैं दो बाते और कहना चाहता हूं जो मुझे अकसर चिंतित करती है। एवं मैने उनपर एक्राग मन से विचार भ्‍ज्ञी किया है। मैंने स्‍वयं देखा है कि अभी अगस्‍त माह में रेल्‍वे कर्मचारी संगठन की बैठक हुई थी उसकी रेली में बहुत बड़ी संख्‍या में बागानों के मजदूर भी आए थे वे झंडे लेकर आए थे उनमें महिलांए नौजवान एवं बच्‍चे सभी शामिल थे उनकी शिकायत थी कि हम लोगों में से बहुत से लोग हिदीं भाषी क्षेत्रों कें है लेकिन हमारे क्षेत्र के इस फूलों में हिंदी पढ़ने की  कोई व्‍यवस्‍था नहीं है। चाय बागानों कें मालिकों ने इसकी कतई व्‍यवस्‍था नहीं की है जिसके कारण बहुत कठिनाई होती है। सरकार का नियम है कि यदि काफी संख्‍या में  ऐसे लोग हो और जिस भाषा को वे लोग जानते है उसी भाषा में उनहें शिक्षा मिलनी चाहिए। यदि यह बात सही है तो उनक बच्‍चों को अनपढ़ रखने से  क्‍या लाभ होगा जो भाषा वे नहीं जानते उसमें पढ़ना उनके लिए संभंव नहीं होगा। इसलिए आप देखें कि इस तरह का काम करने वाले मजदूरों की शिक्षा उस भाषा में  होनी चाहिए जिसे वह अच्‍छी तरह से जानते हो। चाहे वह हिंदी हो तमिल हो या कोई और भाषा मजदूरो के कल्‍याण के इस बजट का संबंध है और यदि मजूदर शिक्षित नहीं होगा तो कल्‍याण की बात भी नहीं समझेगा इसलिए उनकी इस शिकायत को दूर करे ताकि उनमें व्‍यापक संतोष दूर हो सके। अब दूसरी बात दुर्घटना के विषय ही है। दुर्घटनाए चाय के बागानों में बड़ी मात्रा में होती रहती है जिससे मजदरों कें जीवन मरण पर बात बन आती है लेकिन उनके लिए जो मुआबजा आदि उनको मिलना चाहिए वह उचित तरीके से उनको नहीं मिलता है मैं निवेदन करना चाहता हूं कि आप से शीघ्र ही इस ओर ध्‍यान दे क्‍योंकि जहां पर इस तरह की बात है जहां आप के कानून को नहीं माना जाता है वहां इस पर रोक लगाए। आप ऐसा नहीं कह सकते क हमारे देश में बढ़े बढ़े लोग नियम कानून नहीं तोड़ते है जब सरकार खुद अपने कानूनों को तोड़ती है तो मिल मालिकों कें बारे में कहना तो गलत ही है आप जो कानून बना रहे है उनका पालन हो इस बात   को देखना राज्‍य एवं केन्‍द्र सरकार दोनों का काम है। उपाध्‍यक्ष महोदय मैं आपके सामने एक बात और रखना चाहता हूं और वह यह है कि देश में बेकारी बढ़ती जा रही है और इसे रोकने का कोई उपाय सरकार अभी तक नहीं कर पाई है। सरकार अपने दूसरे कार्यो में ऐसी उलझी रहती है कि उसे इस ओर ध्‍यान देने का समय ही नहीं है। यदि वे कार्य की समस्‍या की तरफ सरकार ने ध्‍यान नहीं दिया तो देश का जो बेरोजगार वर्ग है वह क्रांति कर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो सरकार को बड़ी परेशानी का सामना करना पढ़ेगा अत: मेरा सुझाव है कि सरकार को जल्‍दी से जल्‍दी इस समस्‍या की ओर ध्‍यान देना चाहिए यह बेकारी ऐसी नहीं है फूंक मारते ही दूर हो जायेगी इसके लिए सरकार को योजनाबद्ध तरीके से काम करना पढ़ेगा। नये नये रोजगार के अवसर ढूढ़ने होगे। पढ़ाई के ढ़ाचे में परिवर्तन करना पढ़ेगा तथा कुटीर उद्योगों के साथ साथ लघु उद्दयोंगों की ओर भी बढ़ावा देना होगा। महोदय अब में इस देश में फैली अराजकता आवश्‍यक वस्‍तुओं कें मूल्‍यों को बृद्धि के बारे में भी चाहता हूं मैं उन बातों को नहीं दोहराना चाहता हूं जो मेरे दोस्‍तों ने इस सदन कही है एक बात मैं जरूर कहूंगा इस बात हिंदुस्‍तान की चारो तरफ की परिस्थिति बढ़ी खराब है और इसमें किसी एक बात कि किसी जिम्‍मेदारी नहीं है लोगों के पास सामान खरीदने के लिए पैसा नहीं है लोग भूखें मर रहे है ऐसी हालात में आसामाजिक तथ्‍य उनके साथ मिल जाते है और दुकानों को लूटने की कोशिश करते है इसी प्रकार दंगे फसाद हमारे देश में बढ़ रहे है इन सब का कारण मूल्‍यों में बृद्धि से लगाया जा सकता है। लोगों में बेरोजगारी पहले से ही काफी है और उस पर भी अगर उनहें आवश्‍यक वस्‍तुए सस्‍ते दामों पर ना मिल सके तो उनकी हालात और भी खराब हो जाती है । एक बात बिलकुल साफ और सही है कि अगर सामान बाजार में होगा चाहे वह चीनी हो गेहूं हो चावल हो या कुछ भी हो और लोगों के पास उसे खरीदने के लिए पैसा नहीं है तो वे केवल लूटपाट ही करेगे। इसके अलावा चीजों के दाम इतने बढ़ चुके है कि गरीबों कें लिए उन्‍हें खरीदना भी मुश्किल हो गया है। इस सब की जिम्‍मेदारी किस की है। क्‍या उस गरीब की है या देश के बढ़े बढ़े राजनीतिज्ञ दलों की है। मेरे विचार में इस सब की जिम्‍मेदारी केन्‍द्र सरकार की है। और इसके लिए मैं केन्‍द्र सरकार को बता देना चाहता हूं कि जल्‍दी से जल्‍दी इसका कोई ना कोई इंतजाम किया जाये। सभापित महोदय आज हमारे देश में जमाखोरों तथा सरकारी अफसरों में एक समझौता हो चुका है। सरकार ठोक व्‍यापार को अपने हाथ में लेना चाहती है। परंतु जमाखोरों को इससे बहुत नुकसान होगा और इसलिए वे सरकारी अफसरों से मिल गए है और इसलिए वे इस नीति को विफल करना चाहते है। इन शब्‍दों के साथ मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि देश में जो गरीबी तथा भुखमरी का दौर चल रहा है इसको रोकने के लिए सरकार द्वारा कुछ ना कुछ इंतजाम किया जाए।

70 WPM

चेयरमेन साहब मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि हम लोग देख रहे है कि गरीबी सबके लिए नहीं है कुछ लोग तो देश में इस तरह से पनप रहे है‍ कि उनकी संपत...